आशा की कहानियाँ

प्राप्तकर्ता कहानियाँ

आप ने सबसे पहले कब यह महसूस किया कि आप स्वस्थ नहीं है ?

वर्ष 1998 में अचानक एक दिन मुझे यह डायग्नोस किया गया कि मेरी किडनी फेल हो गई है । उचित किडनी दानदाता के अभाव में मेरे जीने का सहारा केवल डायलीसिस ही था ।

प्रारंभिक अवस्था में चिकित्सक ने आपको उपचार के लिये क्या सुझाव दिये?

चिकित्सगण औषधियों, भोजन की निष्चित मात्रा एवं जीवन दिनचर्या में परिवर्तन के माध्यम से किडनी के क्रियेटीनिन लेवल को कम करने का प्रयास कर रहे थे ।

आपको कब कहा गया कि आपको आर्गन ट्रांसप्लांट की आवष्यकता होगी ?

लगातार डायलीसिस और चिकित्सकीय प्रबंधन के बावजूद किडनी की जांचों में कोई सुधार नहीं हो रहा था और मेरा स्वास्थ्य् क्षीण होता जा रहा है तब ईलाज करने वाले चिकित्सकों ने मुझे कहा कि मुझे किडनी ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा ।

आपने अपने आप को आर्गन प्राप्त करने के लिये कैसे पंजीकृत किया ?

मेरे परिवार के सदस्यों के ब्लड-ग्रुप अलग-अलग हैं तो उन्होने समान ब्लडग्रुप के उचित अंगदान दाता की खोज करना शुरु किया। वे भिन्न भिन्न स्थानों पर उचित अंग दानदाता की तलाष में भटके किन्तु उनके सारे प्रयत्न व्यर्थ रहे ।

आप को कैसा लगा जब आपको पता चला कि अंग दानदाता मिल गया है ?

24 अप्रैल 2000 को सुबह 4.00 बजे जब फोन बजा हमने सपने मे भी नहीं सोचा था कि कोई देवदूत मेरे जीवन बचाने के लिये सहारा देगा और मेरी समस्त समस्याओं का निदान करेगा । अंततः मुझे एक विषेषज्ञ चिकित्सालय में किडनी ट्रांसप्लांट के लिये निर्देषित किया गया ।

 

अंगदाता कहानियाँ

उस दिन क्या हुआ था ?

दिनांक 22 अप्रेल को मयंक अपने रिष्तेदरों एवं प्रिय मित्रों के साथ धार्मिक यात्रा के लिये टाटा सूमो से राजस्थान गये थे। नागदा जंक्षन के पास पहुंचने पर वाहन चालक ने अपना संतुलन खो दिया उस कारण गंभीर दुर्घटना हुई जिसमें 8 लोगों को चोंटे आई ।

आप ब्रेन डेथ के बारे में क्या जानते है?

हम मस्तिष्क मृत्यु के बार में कुछ भी नहीं जानते । हमने इस बारे में सुना हुआ था किन्तु वास्तव में यह क्या है हमें नहीं मालूम था । हम मस्तिष्क-मृत्यु के संबंध में यह नहीं जानते थे कि इस अवस्था में मस्तिष्क कार्य करना बंद कर देता है जबकि शरीर के अन्य अंग बिल्कुल ठीक रहते हैं। जब डाक्टरों ने कहा कि मेरा पुत्र नहीं रहा है तो मैं इस बात पर विष्वास नहीं कर सका। मयंक एक निजी चिकित्सालय की गहन चिकित्सा में भर्ती था और सारे प्रयासों के बावजूद उसे मस्तिष्कीय-मृत घोषित किया गया ।

आप दान के लिये कैसे उद्यत हुये?

शव-तुल्य अवयव दान के समन्वयक हमारे पास आये और मंयक की अंतिम अवस्था के बारे में हमें बताया तथा यह भी बताया कि मस्तिष्कीय-मृत्य की दषा में रोगी के जीवित होने की आषा बिल्कुल नहीं के बराबर होती है किन्तु उसके अन्य अवयव पूरी तरह से कार्यषील होते है जो कि किसी जरुरतमंद रोगी को लगाया जाकर उसका जीवन बचाया जा सकता है।

कोई ऐसा अवयव है जिसे आप दान में नहीं देना चाहते थे ? यदि हां, तो उसके कारण क्या थे ?

नहीं, हमें ऐसी कोई समस्या नहीं थी हम तो केवल यह जानना चाहते थे कि वास्तव में हमारा पुत्र अब नहीं रहा या अभी उसके जीवित होने के कुछ आसार हैं ।

किसी भी परिवार के लिये किसी भी सदस्य का खोना बहुत ही कष्टप्रदायक होता है कौन सी प्रिय यादें है जो कि आप हमारे साथ बांटना चाहेंगे ?

मैं यूनियन बैंक आफ इंडिया में कार्यरत हॅ तथा मेरी पत्नी संस्कृत विषय की प्राध्यापक है। मयंक की बड़ी बहन पी. ई. टी. की तैयारी कर रही है । मयंक नौवीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुका था वर्तमान में वह कक्षा 10 में अध्ययनरत था । यह एक संयोग है कि यह हृदय विदारक दुर्घटना उसके जन्म दिन पर ही हुई ।

आप इस क्षति की कैसी पूर्ति करेगें ?

जबकि जीवित होने के आसार बिल्कुल धूमिल है हमने सोचा कि केवल एक ही मार्ग है हमारे प्रिय पुत्र के यादों को संजोने का कि हम उसे अन्य जरुरतमंदों में उसको जीवित देखे और दूसरों के जीवन मे खुषियां देखे।

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