प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न

 

अंगदान के संबंध में कुछ अक्सर पूछे जिसने वाले सामान्य प्रश्नों का उत्तर :

1. अंगदान कौन-कौन कर सकता है?
  कोई भी व्यक्ति -चाहे वह किसी भी उम्र ,लिंग,जाति का हो,वह अंगदान कर सकता है।यदि वह १८ वर्ष से कम उम्र का हो तो उसकेमाता पिता अथवा क़ानूनी अभिभावक की सहमति आवश्यक है। अंगदान के लिये चिकित्सकीय उपयुक्तता मृत्यु के समय निर्धारित की जाती है।
2. मस्तिष्क मृत्योपरांत अंगदान के लिए कौन सहमति दे सकता है?
  एेसे अंगदाता जो अपने जीवन काल में दो गवाहों की उपस्थिति में(जिसमें एक उसका निकट रिश्तेदार है) लिखित सहमति प्रदान कर चुके हैं वे अंगदान की पात्रता करते हैं। इन व्यक्तियों को अंगदाता कार्ड प्राप्त करने के पूर्व अपने रिश्तेदारों व प्रियजनें से चर्चा कर अपनी इच्छा व्यक्त करनी चाहिये। यदि मृत्यु पूर्व इस बाबत् कोई सहमति पत्र अथवा वचन पत्र नहीं भरा गया है तब अंगदान करने का अधिकार उस व्यक्ति को मिलता है जिसके पास शव का विधिवत आधिपत्य है।
3. अंतिम चरण की कौन सी बिमारियाँ अंग प्रत्यारोपण द्वारा ठीक की जा सकती है ?
  ंग प्रत्यारोपण से जो बिमारियाँ ठीक हो सकती हैं ,वे निम्नानुसार हैं:-
- अंतिम चरण में हृदय की विफलता ।
-फेफड़ों की विभिन्न बिमारियाँ ।
-आँखों की पुतली का ख़राब होना (corneal diseases)
- गुर्दों व जिगर की अंतिम चरण की बिमारियाँ ।
-अग्नयाशय की बिमारी
- जलनें से क्षतिग्रस्त हुई त्वचा ।
4. आपका अंग किसको दी जायेगी?
  आपके महत्वपूर्ण अंगों को उन बिमार व्यक्तियों को प्रत्यारोपित किया जाता है जिन्हें उसकी सबसे सख़्त आवश्यकता है।जीवन का यह उपहार चिकित्सकीय उपयुक्तता, प्रत्यारोपण की अतिआवश्यकता ,प्रतिक्षा सूची की स्थिति व अवधि और अन्य भौगोलिक स्थिति के आधार पर ,अंग प्राप्तकर्ताओं से मिलान कर प्रत्यारोपित की जाती हैं।
5. क्या अंगदान के लिये मेरे परिवार को कोई शुल्क देना हेगा?
  प्रत्यारोपण के उपयोग में आने वाले अंगों व ऊतकों के लिये किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं करना होता है। अंगदान एक सच्चा उपहार है।
6. क्या अंग/ऊतकों के निकालने से दाह्् संस्कार /दफ़्न प्रभावित होता है ? क्या इस प्रक्रिया से शरीर निरूपित होता है?
  नहीं। अंग या ऊतक निकालनें की प्रक्रिया अंतिम संस्कार या दफ़्न में किसीभी प्रकार हस्तक्षेप नहीं करती। शरीर के बाहरी रूप में भी कोई परिवर्तन नहीं होता है।अंगों व ऊतकों को अत्यन्त कुशल प्रत्यारोपण शल्य चिकित्सकों की टीम द्वारा निकाल कर अन्य रोगियों को प्रत्यारोपित किया जाता है। चिकित्सक शरीर को बारीकी से सिलतें हैं जिसके फलस्वरूप किसी भी प्रकार का विरूपण नहीं होता है। शरीर को अन्य मामलों की भाँति ही देखा जा सकता है एवं अंतिम संस्कार में विलम्ब भी नहीं होता है।
7. अंगदाता कार्ड पर क्या चिकित्सक को मेरे परिवार से अंगदान की अनुमति लेना होगा ?
  हाँ, आपके परिवार द्वारा हस्तातंरित अंगदाता कार्ड (डोनर कार्ड ) प्रेषित करने उपरांत अंगदान के लिये आपके परिवार की अनुमति ली जायेगी। इसलिए आवश्यक है कि आप परिवार के सदस्यों और प्रियजनें से अपने अंगदान संबंधित निर्णय के बारे में चर्चा कर लें ताकि उन्हें आपकी इच्छा पूरी करना सुलभ रहे।
8. अंगों के दान पर क़ानूनी स्थिति क्या है ?
  ये क़ानूनी रूप से वैध है । भारत सरकार ने फ़रवरी १९९५ में"मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम" पारित किया है जिसके अन्तर्गत अंगदान और मस्तिष्क मृत्यु को क़ानूनी वैधता प्रदान की गई है ।
9. क्या मानव अंगें के बेचने की अनुमति है ?
  बिलकुल नहीं । "मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम १९९४" के अनुसार अंगों व ऊतकों की बिक्री पूर्णत: प्रतिबन्धित है । क़ानून का उल्लंघन करने पर उक्त नियम के अनुसार जुर्माना एवं सज़ा का प्रावधान है।
10. क्या मृत्योपरांत अंगों के घर पर ही निकाला जा सकता है ?
  नहीं ,मस्तिष्क मृत्यु होनें के तुरंत उपरांत ,चिकित्सालय में व्यक्ति को वेंटीलेटर व जीवन रक्षक प्रणाली पर रखते हुए अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था की जाती है। घर में मृत्यु होने के बाद केवल नेत्र और ऊतकों को प्रत्यारोपण हेतु निकाला जा सकता है।
11. क्या अंग प्रत्यारोपण िनशुल्क किया जाता है ?
  नहीं । अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूर्णत: निशुल्क नहीं है। अंगदाता के प्रत्यारोपण हेतु शरीर के अंग तो निशुल्क प्राप्त किये जाते हैं परन्तु प्रत्यारोपण का शुल्क विभिन्न अस्पतालों एवं संबंधित चिकित्सकों द्वारा तय किया जाता है।साथ ही प्रत्यारोपण उपरांत इसके सुचारू रूप से कार्य करने व प्रत्यारोपित अंग के बहिष्कार रोकने हेतु दवाइयों पर व्यय करना पड़ता है।

नेत्रदान के संबंध में कुछ अक्सर पूछे जिसने वाले सामान्य प्रश्नों का उत्तर :

1. नेत्रदान संबंधी तथ्य
 
  • नेत्रदान करने वाले व्यक्ति की मृत्यु के ६ से ८ घंटे के अंदर ही नेत्रदान कर देना चाहिए नजदीकी आई बैंक या कलेक्शन सेंटर को तुरंत सूचित करना चाहिए, चाहे पहले नेत्रदान का शपथ पत्र ना लिया गया हो I
  • नेत्रदान की प्रक्रिया में केवल १० से १५ मिनट ही लगते है और शरीर को कोई क्षति भी नहीं पहुचती I
  • केवल आँख का हीरा (कार्निया) ही प्रत्यारोपण के काम आता है आँख का शेष भाग शोध एवम अध्ययन के प्रयोग में लाया जाता है I
  • नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को आँख की रोशनी का लाभ होता है, एक नेत्रहीन व्यक्ति को एक आँख दी जाती है I
  • नेत्र प्रत्यारोपण प्रतीक्षा सूची के क्रमानुसार ही की जाती है I
  • आँखों को ख़रीदा और बेचा नहीं जा सकता / नेत्रदान को कभी मना नहीं किया जाता I
2. भारत में अंधत्व के प्रमुख कारण
 
मोतियाबिंद 62.60 %
चश्मे के कारण 19,70 %
कालापानी / कांचबिंद 5.80%
पर्दे (रेटिना) के कारण 4.70 %
आपरेशन संबंधी 1.20 %
हीरे (कार्निया) की सफेदी संबंधी 0.90 %
कृतिम लेंस के पीछे की सफेदी 0.90 %
शेष 4.19 %
3. अंधत्व के प्रकार
 
  • Economic blindness – नजर 6/60 से 3/60
  • Social blindness - नजर 3/60 or field 10 degree
  • Manifest blindness - नजर 1/60 to Perception of Light Absolute blindness – No Perception of Light
  • Curable blindness – नजर इलाज द्वारा ठीक की जा सकती है
  • Preventable blindness – सावधानी से नजर बचाई जा सकती है
4. आँख का हीरा (कार्निया) क्या है ?
  आँख का हीरा (कार्निया) पारदर्शी गोलाकार कांच के समान होता है और यह आँख का आगे का भाग होता है I यदि हीरे में सफेदी आ जाती है तो नजर आश्चर्यजानिक तरीके से कम हो जाती है I हीरे में सफेदी चोट लगने से, जन्मजात बीमारी, संक्रमण आदि के कारण आ जाती है I
5. आई बैंक क्या है ?
  आई बैंक एक संस्था है जो दान की गई आँख को एकत्र करके उसको सुरक्षित रखरखाव एवम वितरण की प्रक्रिया करता है, जिससे आँख के हीरा (कार्निया) का प्रत्यारोपण एवम शोध आदि किया जा सके I

किडनी पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्रोनिक किडनी रोग क्या है
  क्रोनिक किडनी रोग मे गुर्दे की कार्यप्रणाली मे, स्थायी अवरुध होता है। इस रोग की गंभीरता मे व्रध्दि के साथ लक्षण ;कमजोरी , मतली , पीलापन , सुस्ती , सूजन और भूख की कमी मे और व्रध्दि हो जाती है। एक निश्चित प्रतिशत से रक्त यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन मे वृद्धि होने पर डायलिसिस आवश्यक हो जाता है। कुछ रोगियों को पहले ही डायलिसिस की जरूरत हो सकती है। गुर्दे स्थायी रूप से असफल हो जाए तो कोई भी दवाई इलाज प्रदान नहीं कर सकती हैं ।
2. डायलिसिस में क्या होता है
  डायलिसिस वह प्रक्रिया है जिसमे गुर्दे के कुछ काम अन्य यंत्र करता है जैसे यह शरीर से जमा कचरा और अतिरिक्त पानी निकाल देता है। अगर गुर्दे स्थायी रूप से असफल हो तो डायलिसिस नियमित रूप से किया जाना चाहिए। डायलिसिस के दो प्रकार के होते हैं 1 हीमोडायलिसिस 2 पेरिटोनियल डायलिसिस
3. क्या डायलिसिस गुर्दा प्रत्यारोपण से अलग है
  हां यह पूरी तरह से अलग है। गुर्दा प्रत्यारोपण में एक स्वस्थ गुर्दा दाता से लिया जाता है और वह व्यक्ति जिसके गुर्दे नाकाम हैं उसके शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है , जबकि डायलिसिस मे बाहरी उपकरण के सहारे की जरूरत होती है। गुर्दा दान में रोगी के किसी रिश्तेदार से या म्रत दाता से लिया जा सकता हैै।
4. कौन गुर्देा प्रत्यारोपण करवा सकते हैं
  यदि मरीज युवा है तो प्रत्यारोपण डायलिसिस की तुलना में बेहतर समझा जाता है। गुर्दा प्रत्यारोपण एक व्यक्ति कों अध्ययन, यात्रा, काम करने के लिए अनुमति देता है , दूसरे शब्दों में रोगी एक सामान्य जीवन जी सकता है। बुजुर्ग रोगियों ;65 वर्ष से अधिक उम्रद्ध को डायलिसिस पर रखना बेहतर होता है आम तौर पर जो रोगी किसी भी अन्य गंभीर रोग यानी दिल की बीमारी या असाध्य रोग से ग्रसित नहीं है वो लोग गुर्दा प्रत्यारोपण तो रोगी के के लिए उम्मीदवार हैं । जब गुर्दा प्रत्यारोपण कि उपयुक्तता की बात आती है लिए भावनात्मक स्थिरता एक मुख्य कारक है इसके अलावा लत का कोई इतिहास न होना एक व्यक्ति को प्रत्यारोपण से गुजरने के लिए एक बेहतर स्थिति प्रदान करता है।
5. कौन गुर्दे दान कर सकते हैं
  रोगियों के निकट रिश्तेदार जिनका रक्त समूह मिलता है तथा उनकी उम्र 21 -65 वर्ष की उम्र के बीच हे गुर्दा दान कर सकते है जिसके लिये परिजनों को ऊतक मिलान परीक्षण सहित परीक्षणों की एक श्रृंखला से गुजरना होता है तब गुर्दा दान के लिए उनकी उपयुक्तता का पता लगता है रोगी के परिवारिक संबंधी के अलावा अन्य लोगों को आमतौर पर दान करने की अनुमति नहीं है।
6. कब तक गुर्दा प्राप्तकर्ता को अस्पताल में रहना होगा
  गुर्दा प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं केा अस्पताल में सात दिनों तक रहना होता है। हालांकि यह कई कारकों पर निर्भर करता है, चार दिन से तीन सप्ताह तक प्राप्तकर्ताओं केा अस्पताल में रखा जा सकता हैं।
 

त्वचा प्रत्यारोपण पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कोई व्यक्ति अपनी त्वचा कब दान कर सकता है?
  मृत्योपरांत , कोई भी व्यक्ति मृत्यु के छ: घंटे के भीतर अपनी त्वचा दान कर सकता है।
2. किस प्रकार का व्यक्ति मृत्योपरांत अपनी त्वचा दान कर सकता है?
  िसी भी लिंग और रक्त समूह (ब्लड ग्रुप ) का व्यक्ति त्वचा दान कर सकता है। त्वचा दान की न्यूनतम आयु १८ वर्ष है परंतु आयु की कोई भी ऊपरी सीमा नहीं है।यानि कि एक १०० साल का व्यक्ति भी मृत्योपरांत अपनी त्वचा दान कर सकता है।
3. त्वचा दान की समस्त प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
  संपूर्ण प्रक्रिया में ३० से४५ मिनट लगते है।
4. क्या त्वचा दान के लिए त्वचादाता को अस्पताल ले जाना आवश्यक है?
  नहीं । दान की गई त्वचा को लेनें के लिए प्रत्यारोपण टीम के सदस्य मृतक के निवास/ अस्पताल /शवगृह अथवा जहाँ भी शव रखा हो वहाँ आ सकते हैं।मृतक को त्वचादाता के लिए एंबुलेंस/आपरेशन कक्ष अथवा अस्पताल ले जाने की आवश्यकता नहीं है।
5. त्वचा निकालनें की प्रक्रिया कौन संपादित करता है?
  त्वचा निकालनें की प्रक्रिया एक टीम द्वारा संपादित की जाती है जिसमें एक चिकित्सक, दो नर्स व एक सहायक शामिल रहते हैं।
6. त्वचा कैसे निकाली जाती है?
  त्वचा निकालने हेतु बैटरी संचालित उपकरण "डरमाटोम"(dermatome) प्रयोग में लिया जाता है।ये केवल इस ही उद्देश्य के लिए बनाया गया है।
7. शरीर के कौन से हिस्से से त्वचा निकाली जाती है?
  प्रत्यारोपण के लिए दोनों पैर,दोनों जाँघ और पीठ के हिस्से की त्वचा ली जाती है।
8. क्या त्वचा को पूरी मोटाई से निकाला जाता है ?
  त्वचा की ऊपरी परत, जो कि त्वचा की पूरी मोटाई का आठवाँ भाग होता है को प्रत्यारोपण के दौरान प्रयोग में लिया जाता है।
9. त्वचा निकालनें पर क्या रक्तस्त्राव होता है अथवा क्या शरीर के विरूपित होनें की संभावना रहती है ?
  नहीं ।न तो रक्तस्त्राव होता है और न शरीर का विरूपण होता है। त्वचा निकालनें के उपरांत उचित तरीक़े से पट्टी की जाती है।
10. किन अवस्थाओं में त्वचा दान में लिया जाना उचित नहीं रहता है ?
  एच.आई.वी. ,हैपेटाइटिस बी व सी,यौन संचारित रोग ,गंभीर संक्रमण होने पर अथवा चर्म कैंसर होने की स्थिति में प्रत्यारोपण के लिए त्वचा दान में नहीं ली जा सकती है। इन बिमारियों की जाँच त्वचा निकालने के पूर्व कर ली जाती है।्र्
11. क्या मधुमेह या उच्च रक्तचाप से पीड़ित रोगियों की त्वचा प्रत्यारोपण के लिए ली जा सकती है ?
  हाँ ,इन बिमारियों के रहते हुए भी त्वचा दान का कार्य किया जा सकता है ।
12. दान की गई त्वचा का प्रयोग किस प्रकार किया जा सकता है ?
  दान में प्राप्त की गई त्वचा का परिक्षण कर प्रोसेस किया जाता है । तत्पश्चात् इसे प्रत्यारोपण के लिए शल्य चिकित्सक को सौंप दिया जाता है ।
13. निकाली गई त्वचा का सरंक्षण किस प्रकार किया जाता है ?
  निकाली गई त्वचा को ८५%'गलिसरौल' (glycerol) नामक पदार्थ में सरंक्षित कर ४से ५ डिग्री सैल्सियस के तापमान में संग्रहित किया जाता है ।यह पाँच वर्ष तक संग्रहित किया जा सकता है।
14. क्या त्वचा लेने के लिए आने वाली शल्य चिकित्सा टीम को किसी प्रकार के प्रमाण पत्र की आवश्यकता रहती है ?
  हाँ, टीम के समक्ष केवल मृत्यु -प्रमाण पत्र की छाया प्रति लिपि प्रेषित किया जाना आवश्यक है।
15. ्या त्वचा प्रत्यारोपण के पूर्व त्वचा दाता एवं त्वचा प्राप्तकर्ता के बीच किसी प्रकार का मिलान किया जाना आवश्यक है ?
  नहीं, किसी भी एक त्वचा को किसी अन्य पर प्रत्यारोपित किया जा सकता है । न तो ब्लड ग्रुप का मिलान और न ही रंग अथवा उम्र का मिलान किया जाना आवश्यक है । प्रत्यारोपण के पूर्व समस्त ब्लड़ रिपोर्ट सामान्य होने पर ये कार्य आराम से किया जा सकता है ।
16. क्या त्वचा दान करने के पूर्व किसी प्रकार का शपथ पत्र अथवा पंजीकरण करवाना अनिवार्य है ?
  नहीं, न तो शपथ पत्र ,और न ही पंजीकरण करवाना अनिवार्य है । यदि समय पर सूचना प्राप्त होती है,तब टीम द्वारा प्रत्यारोपण हेतु त्वचा ली जा सकती है । यदि आपने जीवन काल में अपने परिवार के सदस्यों व प्रियजनों को अंगदान संबंधित निर्णय से अवगत करा अंगदाता कार्ड प्राप्त कर लिया है तो यह प्रक्रिया काफ़ी सरल हो जाती है । अंगदान के लिए आप आॅन लाइन पर रजिस्टर कर सकतें है ।
 

देहदान से संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्न एवं उनके जवाब:

1. देहदान क्यों आवश्यक है?
  समाज को कुशल चिकित्सक देने हेतु उसको मानव शरीर रचना का पूरा ज्ञान होना आव"यक है। जो मृत शरीर पर परीक्षण द्वारा ही संभव है। इस हेतु देहदानदमृत्यु उपरान्त संपूर्ण शरीर का दान अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
2. देहदान कौन-कौन कर सकता है?
  देहदान प्राकृतिक मृत्यु के उपरांत किसी भी धर्म या जाति के वयस्क सदस्य द्वारा किया जा सकता है।
3. देहदान का संकल्प कब किया जा सकता हैं?
  देहदान का संकल्प 18 वर्ष के उपरांत कभी भी किया जा सकता है।
4. देहदान हेतु संकल्प पत्र भरने की आवश्यक अर्हताएं?
  देहदान हेतु संकल्प पत्र भरने के लिए निम्नलिखित अर्हताएं आवश्यक है:-
1. स्वयं का संकल्प।
2. संकल्पकर्ता का छायाचित्र 2 फोटो ।
3. स्वयं की फोटो- पहचान पत्र की छायाप्रति।
4. स्थायी निवास से संबंधित प्रमाण-पत्र की छायाप्रति।
5. दो गवाहों की सहमति दजो संकल्पकर्ता के निकटतम परिजन हो।
6. गवाहों के फोटो, फोटो पहचान-पत्र एवं स्थायी निवास संबंधित प्रमाण-पत्र की छायाप्रति।
5. देहदान हेतु संकल्प पत्र कहॉ से प्राप्त किया जा सकता है?
  देहदान हेतु संकल्प पत्र चिकित्सा महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग एनाटॉमी विभाग एवं गैर शासकीय संगठन एनजीओ दधिचि संस्था एवं मुस्कान ग्रुप से प्राप्त किया जा सकता है। संकल्प पत्र वेब साइड पर वतहंदकवदंजपवदपदकवतमण्वतह पर उपलब्ध है।
6. क्या आकस्मिक प्राकृतिक मृत्यु उपरांत देहदान किया जा सकता है?
  हॉ, चिकित्सा महाविद्यालय से संपर्क कर क्यू फार्म भरकर देहदान किया जा सकता है।
7. क्या नेत्र एवं त्वचा दान के उपरांत भी देहदान किया जा सकता है?
  हॉ, नेत्र एवं त्वचा दान के उपरांत भी देहदान किया जा सकता है।
8. मृत्यु उपरांत कितने समय के अन्दर देहदान किया जा सकता है?
  मृत्यु के उपरांत देह का दान अधिकतम 15 घंटे के अन्दर किया जा सकता है। अगर किसी कारणवश विलम्ब होता है तो मृत देह को बर्फ में सुरक्षित रखे जिससे मृत देह खराब न हो। यही प्रकिया अधिक गर्मी में भी अपनाये जिससे मृत देह परीक्षण हेतु सुरक्षित रहे।
9. देहदान के समय कौन-कौन से दस्तावेज होना अनिवार्य है?
  देहदान के समय निम्नलिखित दस्तावेजों का होना अनिवार्य है।
1. पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी किया हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र।
2. जिसका देहदान किया जा रहा है उसका एवं उसके निकटतम परिजनों का फोटो,
3. जिसका देहदान किया जा रहा है उसका एवं उसके निकटतम परिजनों का फोटो पहचान पत्र एवं स्थायी निवास संबंधि प्रमाण पत्र की छायाप्रति।
नोट: उपरोक्त दस्तावेज की आवश्यकता दान कर्ता एवं परिजनो के सम्मान हेतु आव"यक है जिससे सम्मान समारोह में उन्हें आमत्रित किया जा सकें एवं उनका सम्मान सहित आभार प्रदर्शन किया जा सकें।
10. किसका देहदान स्वीकार नहीं है?
  निम्नलिखित कारणों से देह दान स्वीकार नहीं है।
1. तपेदिक (टी.बी.) से संक्रमित मृत्यु।
2. केंसर से संक्रमित मृत्यु।
3. एच.आई.वी. (एड्स) से संक्रमित मृत्यु।
4. हेपेटाइटिस से संक्रमित मृत्यु दहेपेटाईटिस बी. एवं सी.।
5. गंभीर संक्रमण से संक्रमित मृत्यु।
6. एमएलसी केस।
7. शव विच्छेदन पोस्टमार्टम उपरांत एवं अंग दान यकृतदलिवर, गुर्दादकिडनी आदि उपरान्त शव परीरक्षण संभव नहीं हो पाता है।
11. देहदान प्रमाण-पत्र कब दिया जाता है?
  देहदान प्रमाण-पत्र देहदान दिनांक के उपरांत दो दिन बाद कार्यालयीन समय पर शरीर रचना विभाग के कार्यालय से निकटतम परिजन द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
12. शव परिक्षण के उपरान्त उसका क्या उपयोग है ?
  शरीर के समस्त भागो की रचना का अध्ययन चिकित्सा छात्रो के किये जाने के उपरान्त म्यूजियम स्पेसिमेन तैयार किये जाते है जिससे इनका उपयोग भविष्य में भी अध्ययन हेतु किया जा सके। अस्थियां भी अध्ययन हेतु उपयोग में की जाती है।
13. क्या एक बार शव परिरक्षण के उपरान्त कोई अंग जीवित व्यक्ति के काम आ सकता है ?
  नहीं एक बार शव परिरक्षण होने के पश्चात कोई भी अंग जीवित व्यक्ति के काम नहीं आ सकता हैं ।

 

© 2019 Organ Donation Indore. All rights reserved